फ्रेम

उपस्थित एक भरी पूरी उम्र लेकर दुनिया से विदा हुई दादी के बारे में सोचता है उसका पोता बड़े से फ्रेम में उसके चित्र को देखता। विस्तार में फ्रेम को घेरे उसका चेहरा बेशुमार झुर्रियां लिए जिनमे तह करके रखा है उसने अपना समय। समय जो साक्षी रहा है कई चीज़ों के अन्तिम... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[26 Oct 2009 06:04 AM]

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