इलाहाबाद के कुछ लफ़्फ़ाज किस्से
और इस तरह इलाहाबाद में ब्लागर संगोष्ठी संपन्न हुई। शानदार अनुभव हुये। लोगों से मिले-मिलाये। घूमे-घुमाये। गपियाये। हंसे-ठठाये। लौट के आये।
अब आप इसे हमारी बेशरमी कहें या संवेदनशीलता या फ़िर हमारे लिये किये गये तथाकथित शानदार वीआईपी टाइप इंतजाम की कृप...
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फ़ुरसतिया
इलाहाबाद
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[25 Oct 2009 23:10 PM]



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