घट घट में पंछी बोलता-वीणा सहस्रबुधे-येसुदास
भोर के स्वर हैं... ईश है... आशीष है .. दो गीत अलग अलग आवाजों में ... घट घट में पंछी बोलता आप ही डंडी आप तराजू आप ही बैठा तौलता ... स्वर--वीणा सहस्रबुधे ज़िंदगी को संवारना होगा कोई सूरज उतारना होगा स्वर -येसुदास...
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पारूल
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[25 Oct 2009 21:22 PM]



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