मधुर कुलश्रेष्ठ की दो कविताएँ
मजदूर शहर के व्यस्ततम चौराहे पर लगी है हाट मजदूरों की लोग आलू, प्याज की तरह हाथों की मछलियाँ देख-देखकर छाँट रहे हैं मजबूत मजदूर ताकि मजदूर के पसीने की बूँदों से चमक उठे उनके सपनो का महल. 2- अपना अपना दर्द झोपड़ी को दर्द है कि वह कभी अपना सिर उठाकर सी...
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सहज साहित्य
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[25 Oct 2009 13:30 PM]



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