व्यंग्य कहानी
आदिवासी-पंडित - गिरिश पंकज विक्रमार्क फिर भागा वेताल के पीछे और उसे कंधे पर लाद कर आगे चलने लगा। बेताल ठहाके लगा रहा था और विक्रमार्क हमेशा की तरह भाव-शून्य चेहरे के साथ बढ़ा जा रहा था। विक्रमार्क की ओर से कोई प्रतिक्रिया न देख कर वेताल बोला-...
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Arun Kumar Jha
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[25 Oct 2009 13:00 PM]



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