मनुष्य

दायरे ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति मनुष्य कही खो गया है अपने ही दिए नामो में इस कदर उलझा हुआ है खीझ ,बैचेनी ,तमतमाहट और रेत तन जो रह गया है विश्व की सुन्दरता , प्राक्रतिक सुषमा अब मन को लुभाती नही है भावो की मृदुलता मन की कोमलता पागलो की निशानी है ये भाव नैत... [पूरी पोस्ट]
writer USHA GAUR
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[25 Oct 2009 09:27 AM]

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