दुनिया बदलने वाली है
मन तरंगों संग हिलोरे , ले रहा है आज कल | कौन जाने कौन सी, दुनिया सवरने वाली है| | घुप्प अँधेरे रात में, बिजलियों की ये चमक | ये इशारा कर रही है, रात छटने वाली है | | बाग में पीपल के पत्ते, गिर गए तो क्या हुआ, अब कपोलों की छटा, हर और दिखने वाली...
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Tapashwani Anand
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[25 Oct 2009 09:17 AM]



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