लकीरें

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का लकीरों और तकदीरों में अजब मेल होता है हमारे हाथो में भी मुकम्मल खेल होता है एक पतली सी रेखा बदलती है जिंदगानी कर रुख क्या कोई सच भी इतना संगीन होता है अगर मै कहूं मैं लकीरों को बोलते देखा तकदीरों को तौलते देखा लोगों को हास- परिहास का मुद्दा मिल जायेग... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[25 Oct 2009 06:20 AM]

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