और.....ऐसा मैं कभी होने न दूंगी !...

PRAKAMYA और..... .ऐसा मैं कभी होने न दूंगी !...... . मैंने अक्सर चाहा... पांवों में पहन चांदी की छनकती झांझर सुर्ख गुलाब की पंखुडियों पे चलूँ मैं मखमल की चादरों पे चल के मंजिलों को गले लगाऊं मैं .. . पर ये तुमने होने न दिया ..... . मैंने अक्सर चाहा... इस धूप... [पूरी पोस्ट]
writer Akanksha
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[25 Oct 2009 05:47 AM]

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