जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं

गीत-ग़ज़ल जज्बात हमसे लिखवाते हैं है कोई न कोई तो बात जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं अपने हाथों में जिन्दगी जितनी बच जाये फिसले जाते हैं दिन रात जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं अपना चेहरा ही नहीं जाता है पहचाना हुई ख़ुद से यूँ मुलाकात जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं रोये गा... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[25 Oct 2009 05:36 AM]

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