अवधी हमारी..अवधी हमारी...
सबन का राम राम ! अत्तवार कै हाजिरी कुबूल कीन जाय | भासा-प्रेम पै यक कविता ... ''जँह भिनसार हुवै चिरइन से , फूटै किरन-उछाह | स्रम-संसकीरत-देव किसानै पकड़ै खेती-राह | मंदिर-मंदिर 'मानस' गूंजै, महजिज करै अजान | &...
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अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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[25 Oct 2009 03:56 AM]



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