राह दिखाये कोई रहबर इस गुलिस्तान में…
राह दिखाये कोई रहबर इस गुलिस्तान में
जारी रहे अपना सफर इस गुलिस्तान में
चंद नसीहते माँ की सुन लो घर से दूर जाने वाले
तुझे लगे न किसी की नज़र इस गुलिस्तान में
बुजुर्गों की अकीदत में गर अपना सर झुकायेंगे
उंचा होगा अपना सर इस गुलिस्तान में
इक अरमां मिरे...
[पूरी पोस्ट]
कल्पना भारती
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[24 Oct 2009 22:04 PM]



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