राह दिखाये कोई रहबर इस गुलिस्तान में…

कल्पना की उड़ान ~~~wings of kalpana राह दिखाये कोई रहबर इस गुलिस्तान में जारी रहे अपना सफर इस गुलिस्तान में चंद नसीहते माँ की सुन लो घर से दूर जाने वाले तुझे लगे न किसी की नज़र इस गुलिस्तान में बुजुर्गों की अकीदत में गर अपना सर झुकायेंगे उंचा होगा अपना सर इस गुलिस्तान में इक अरमां मिरे... [पूरी पोस्ट]
writer कल्पना भारती

hindi poems

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[24 Oct 2009 22:04 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix