....तब कलेजा फट गया

गली करतार सिंह भावुक नहीं हूं..... धर्म कर्म में दिलचस्पी भी बस स्वार्थ भर...गहरी मुसीबत में फंसे तो देवी-देवताओं को याद कर लिया....लेकिन फिर क्यों आंखें गीली हो गईं...गला रुंध गया...बरसों पीछे छूट गया वो नदी जैसा गंगासागर तालाब याद आया......घाटों पर छूटने वाले पटा... [पूरी पोस्ट]
writer मिहिर
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[24 Oct 2009 16:19 PM]

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