....तब कलेजा फट गया
भावुक नहीं हूं..... धर्म कर्म में दिलचस्पी भी बस स्वार्थ भर...गहरी मुसीबत में फंसे तो देवी-देवताओं को याद कर लिया....लेकिन फिर क्यों आंखें गीली हो गईं...गला रुंध गया...बरसों पीछे छूट गया वो नदी जैसा गंगासागर तालाब याद आया......घाटों पर छूटने वाले पटा...
[पूरी पोस्ट]
मिहिर
22
3
0
3
4
[24 Oct 2009 16:19 PM]



Shuffle








