हँस के जीवन काटने का मशवरा देते रहे

भीगी गज़ल हँस के जीवन काटने का, मशवरा देते रहे आँख में आँसू लिए हम, हौसला देते रहे. धूप खिलते ही परिंदे, जाएँगे उड़, था पता बारिशों में पेड़ फिर भी, आसरा देते रहे जो भी होता है, वो अच्छे के लिए होता यहाँ इस बहाने ही तो हम, ख़ुद को दग़ा देते रहे साथ उसके रंग, ख... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[24 Oct 2009 13:32 PM]

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