"पल-पल बढ़ती हुयी..."

एकांत में बैठा मै कुछ सोच रहा था की तभी कुछ लिखने की चाह में मैंने कलम उठा ली| फिर जो भावनाए निकली वो अब आपके सामने प्रस्तुत है..... पल-पल बढ़ती हुई  रिश्तों की गहराई में  खामोश निगाहों से  कहती थी वो कुछ बातें,  समझ बनी तो ... [पूरी पोस्ट]
writer "लोकेन्द्र"
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[24 Oct 2009 06:36 AM]

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