दो दिन के लिए मेहमान यहाँ .....

किस से कहें ? आज अजीब सा दिन है ..... एक बहुत बड़े अज़ाब से छूट गया हूँ .. या शायद एक जाविदाँ ग़म की गिरिफ़्त में आ गया हूँ ......... ऐसे हर मौक़े पे मुझे बस दो लोग याद आते हैं ......... मीर तकी 'मीर' और असदुल्लाह खाँ 'गालिब' ... असदुल्लाह खाँ 'गालिब' ... ....के दो त... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ मीत
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[24 Oct 2009 04:15 AM]

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