दो बातें
खिंची हुई नस, घूमी हुई फिल्ली की तरह आहत विश्वासों से उठने वाले एहसास, रह-रह टीस देते हैं निरंतर ... ***************** *********** **** ** * तुम विश्वस्त थे नही सो आश्वस्त हो जीने का सुख भी ईश्वर ने तुम्हे दिया नहीं सब पा कर भी कितने दरिद्र रहे, मित्...
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पारूल
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[24 Oct 2009 03:34 AM]



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