भर्तृहरि शतक-क्षमा हो तो कवच और क्रोध हो तो शत्रु की क्या आवश्यकता (kshama aur krodh-hindu adhyatmik sandesh)

शब्दलेख सारथी क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं किं फलम्। किं सर्पैयीदे दुर्जनाः किमु धनैर्विद्याऽनवद्या चदि व्रीडा चेत्किमुभूषणै सुकविता यद्यपि राज्येन किम्।। हिंदी में भावार्थ- यदि क्षमा हो तो किसी... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[24 Oct 2009 01:39 AM]

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