राम लीला
एक हैं श्रीमती फ्रूत्वाला कल्पना उन्होंने दी मुझे राम-लीला की कल्पना, जब हम चले उसे करने साकार, तब हमारा साथ देने आए भाई किशोर, बहुत कठिन थी, लम्बी थी डगर, समय कम था, हम चल पड़े मगर, जब मन में हुयी थोडी उथल-पुथल, पूरी तरह साथ देने आयी सोनल, मन में जो...
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Jayant Chaudhary
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[23 Oct 2009 20:03 PM]



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