आदमी की फ़ितरतें बदली नहीं हैं देखिए

अनौपचारिक आदमी की फ़ितरतें बदली नहीं हैं देखिए कौन है जो कह सके कर ली तरक्की देखिए राम औ’ रहमान दोनों हैं बहुत अमनो पसन्द’ जिक्र-ए-मजहब हो कहीं, उनकी शराफ़त देखिए स्वर्ण कंगूरे कलश तो देखिए ही, साथ में नंगे पुजारी और अधनंगे भिखारी देखिए उम्रभर लडते रहे जिसकी रिह... [पूरी पोस्ट]
writer अर्कजेश
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[23 Oct 2009 18:51 PM]

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