चित्रगुप्त हा घेरी-बेरी जोजियावत हे, यम के भंइसा अब ब्‍लाग बनावत हे.

अड़हा के गोठ जमराज हा चित्रगुप्त ला रात के बने चेता के सुतिस के मोर भैंसा ला बने खवा पिया के सुग्घर मांज धो के राखहु, काली मोला मुंधरहाच ले कोरट जाना हवय भुलाहु झन, चित्रगुप्त हा जम्मो नौकर मन ला चेता के ऊहु हा सुते ला चल दिस, ऍती बिहनिया हुईस ता जमराज हा कोरट जा... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

बियंग ललित शर्मा

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[23 Oct 2009 12:55 PM]

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