क्यों धूप क्यों !
धूप ! आजकल हर सांझ जाने से पहले तुम , इतनी गहरी पीली जर्द क्यों हो उठती हो ? क्यॊं पेड़ों के मटमैले हरे झुरमुट से रिसकर पीछे दीवार के पर्दे पर पड़ते तुम्हारे निर्वाक व निमीलित बिम्ब इतने घने, प्रगल्भ व प्रगाढ़ पीत हो जाते हैं कि अनिमेष उन्हें देखते देखत...
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Aarjav
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[23 Oct 2009 11:08 AM]



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