हमेशा के लिए...

मेरा कुछ सामान... मेरी पिछली कविता पर एक दोस्त की टिपण्णी आई कि ये पुराने ज़माने की कविता लगती है... ख़त वगैरह की वजह से... मैं सहमत नहीं हूँ, फिर भी.. पेश है एक modern version with same meaning!!!) तेरे दिए कुछ gifts, चंद mails जो starred थे, आज से पहले, वो अनगि... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[23 Oct 2009 05:36 AM]

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