वे दिन और पहली बार प्रेम जैसा कुछ

उपस्थित वे बेकार पड़े टायरों में उकडू फंस कर लुढ़कने और दुनिया को तेज़ गोल घूमते देखने के दिन थे. किसी दोस्त की एक सक्षम लात से चोट खाकर लुढ़कता था किसी ट्रक का बेकार टायर अपने में कैद एक लड़के को हर एंगल से दुनिया दिखाता. और यूँ तय होता था टीले की ऊंचाई से सम... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[22 Oct 2009 06:31 AM]

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