एक हाथ से ताली कभी नहीं बजती

श्री सत्यनारायण भटनागर जी का पन्ना मैं एक परिवार में मेहमान था । रात्रि के भोजन के बाद मैं बिस्तर पर विश्राम के लिए पहुँचा। थोड़ी देर बाद मुझे पास के कमरे से पति पत्नी के वाकयुद्ध के स्वर सुनाई दिए। ये स्वर बड़ी तीव्र गति से बढ़ रहे थे। थोड़ी देर बाद वे दोनो लड़ते हुए कमरे के बाहर आ ग... [पूरी पोस्ट]
writer सत्यनारायण भटनागर
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[22 Oct 2009 06:01 AM]

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