तुम्हारी खुशबू अभी भी यही पे बिखरी है,तुम्हारी मुस्कुराहटें हैं आस पास वही....
कुछ दिन हुए .....पता नही किस के ब्लॉग पर पढ़ा था "अग़र किसी जगह से आपकी मीठी यादे जुड़ी हों तो वहाँ दोबारा कभी नही जाना चाहिये... " बात सच थी क्योंकि यादे वहीं रह जाती हैं, और वक़्त आगे निकल जाता है। हम सब कुछ यादों के अनुसार ढूँढ़ते हैं... छोटी छोटी बा...
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कंचन सिंह चौहान
नज़्म
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[22 Oct 2009 03:29 AM]



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