आवागमन
वे गहन वेदना के क्षणों में, और गूंजते सन्नाटों में , अक्सर ढूँढा करती हैं हमारी खुशियाँ | जब वे जिया करती हैं मिलने की तीव्र उत्कंठा लिए. तब हम होते हैं जल्दबाजी में ; बघारते हैं एक से बढ़कर एक थ्योरी , और भर देते हैं कूडेदान बीमारी लिए अनेकानेक लिफा...
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धीर.
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[21 Oct 2009 16:26 PM]



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