इधर उधर बिखर गया !!
न जाने कौन शख्स था जो अधजगी सी आँखों में धनक के तमाम रंगों के सौ ख्वाब उधार दे गया जो मेरे दोनों हाथों को एक बार थाम कर उम्र भर को बंदी बना गया ये उस के हाथों का लम्स ये धनक के रंग क्या थे ? मेरे वुजूद में क्योंकर आये ?? कैसा फ़ुसूँ था कि तारी हुआ और...
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अमिताभ मीत
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[21 Oct 2009 10:52 AM]



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