कोई तो होता .....

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** कोई तो होता ...... दिल की बात समझने वाला सुबह के आगोश से उभरा सूरज सा दहकता रात भर चाँद सा चमकने वाला पनीली आखों में है खवाब कई ... कोई संजो लेता .. इन में संवरने वाला थरथराते लबों पर ठहरा है लफ्जों का सावन कोई तो होता .. इनमें भीगने वाला दिल की धडकन... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[21 Oct 2009 02:14 AM]

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