घी का दीपक..

साधवी इस दीपावली एक घी का दीपक छत की उस मुंडेर पर भी रखा.. जहाँ आकर तुम्हारी यादें मुझसे मिला करती थी.. मेरे जीवन को रोशन किया करती थी.. शायद दीपक की रोशनी उन यादों को भटकी राह दिखाये... एक उम्मीद बाकी है अभी!!... [पूरी पोस्ट]
writer साधवी

मैं

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[20 Oct 2009 21:13 PM]

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