'रात ग़मे तन्हाई की --चंदा ओ चंदा '
पेश हैं कुछ शेर ..साथ लिखे हैं तो ग़ज़ल जैसी लग रही है....अब जैसे हैं वैसे के वैसे उनके कुदरती रूप में 'आप के सामने हैं. 'रात ग़मे तन्हाई की' ----------------------- ग़मे तन्हाई की रात बहुत गहरी है, बन के ओस मेरे आंसू बिखर जाते हैं. दिल की चोखट पर कभ...
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अल्पना वर्मा
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[20 Oct 2009 21:09 PM]



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