दिल टूटने से, और बढ़ गई दिलों की दूरियाँ

जीवन के पदचिन्ह दिल टूटने से, और बढ़ गई दिलों की दूरियाँ पर कोई क्या बताए क्यों थी दिलों में दूरियाँ दिल में रख छोड़ा था एक ख्याब सुनहरा सा जिनमे हमेशा वो रहा जिसके ख्याबों में मैं ही कहाँ था? और क्या कहें,  क्या रही हमारी मजबूरियाँ... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

दिल

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[20 Oct 2009 14:20 PM]

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