ग़ज़ल:- गली आखिरी....!

कुनाल (सिफर) शुरुवाती ख्याल के मुत्तालिक , एक मुक्तारिब बहर मैं ग़ज़ल अपनी जानिब से पेश कर रहा हूँ.. . और बस अपने दिल को यहाँ रख रहा हूँ .. Behar hai :- mutqarib (lGaGa lGaga lGaGa lGaGa)---(In Digit:-122 122 122 122) --------- ख्याल ---------- चलने से पहले कुछ स... [पूरी पोस्ट]
writer Kunaal
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[20 Oct 2009 10:39 AM]

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