डिटरजेंट से धोई हुई "साइन्साना ख्वाहिशो" पे बाइस्कोप !
इधर हमें साइंस से कुछ ज्यादा ही उम्मीदे लगने लगी है ...जब भी हम अपने एक पुराने दोस्त को फोन मिलाते है ...उधर से कुछ अजीब सी आवाजे सुनाई देती है ...कुछ खा रहे हो....हम संशकित होकर पूछते है ......
क्या ?
समोसा ...
अकेले ?
नहीं ब्रेड में दबाकर .....
हमे...
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डॉ .अनुराग
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[20 Oct 2009 10:26 AM]



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