मुझे मेरा पीहर लौटा दो
एकालाप मणिपुरी स्त्री का पर्वगीत मुझे मेरा पीहर लौटा दो कब से देख रही हूँ रास्ता माँ के घर से बुलावा आएगा मैं पीहर जाऊँगी सबसे मिलूँगी
बचपन से अपनी पसंद के पकवान जी भर खाऊँगी निंगोल चाक्कौबा पर्व मनाऊँगी बरस भर से देख रही हूँ रास्ता याद आता है बचपन ब...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[20 Oct 2009 09:27 AM]



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