बुढ़’क अर्थशास्त्र (खट्टर काका)

कतेक रास बात लेखक: खट्टर काका भातिज लोकनि; हमरा बुझल अछि जे हमर फोटो देखि अहाँ लोकनि अपन आँखि भौँह सरियाबे लागल होयब. अधिकाँश लोकनि’क मुँह सँ बिनु प्रयासे के मुस्की छुटि रहल होयत. मुदा हम अपने लोकनिक मुस्की’क कारण जानए चाहैत छी. आई धरि कहियो एहेन भेल अछि जे हम अह... [पूरी पोस्ट]
writer Khattar Kaka
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[20 Oct 2009 08:20 AM]

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