सोचो सोचो सोचो ......

दायरे औलाद ने मुह मोड़ा ये नौबत क्यो आई jhaanko अपने अंदर संस्कार देने में कमी आई पैदा करना है आसान पालन करना मुश्किल ठीक उसी तरह से जैसी मरना है आसान पर जीना है मुश्किल हाय तौबा मचा रहा है आज अजानी इंसान पैदा करने की कीमत मांगे बच्चो से इंसान सोचो सोचो ...... [पूरी पोस्ट]
writer USHA GAUR
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[20 Oct 2009 06:19 AM]

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