इतिहास का एक अजनबी

ख्वाब का दर ये तब की बात है जब मैं तब पांच-छह साल का था। मेरी मम्मी चूंकि पत्रकार थी, इसलिए काम के सिलसिले में अक्सर उनका शहर से बाहर आना-जाना लगा रहता था। मेरी मां सोचती थी कि कि चूंकि मेरी कोई बहन या भाई नहीं है इसलिए मेरे लिए बेहतर ये है कि मुझे वे नाना-नानी... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Parashar
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[20 Oct 2009 06:04 AM]

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