पुनर्वालोकन
एक और दोगला ! मेरी आँखों के आँसुओं को केवल नमकीन पानी समझना और, अपने आँसुओं को खून के आँसुओं की संज्ञा देना तुम्हारे दोगले स्वभाव का परिचायक ही तो है वगरना मेरे जिस आघात से तुम्हे चोट पहुँची मुझे भी तो वैसे ही तुम्हारे आघात से अधिक नहीं तो कुछ तो दर्...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[20 Oct 2009 02:32 AM]



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