एक माँ की ज़ुबानी! अपनी बेटी की कहानी!!!

रज़िया मिर्ज़ा पता ही नहिं चला कि वक़्त कहाँ गुज़र गया? लगता है कि तुम अभी भी हमारी गोदी में खेल रही हो ! मुझे याद है तुमने जब हमारे यहाँ आने की दस्तक दी थी। नर्स ने पहले तुम्हें तुम्हारे पापा की गोदी में दीया। पापा ने तुम्हारे कानों में “ अज़ान ” देकर अम्मी की गोदी म... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[20 Oct 2009 00:22 AM]

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