तुम अब भी क्यों हो...
तब जबकि तुम थे, सिर्फ तुम ही थे, पर तुम अब भी क्यों हो, जबकि तुम तो चले गए... सफलता के आसमां पर आकर, याद आ रहे हैं वो रेत जिससे, ज़मीं पर हमने खेला है... सफ़र था तो हमसफ़र थे, ऊफ़्फ़, ये जीतने की ललक!! मंजिल पे दिल...
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अम्बरीश अम्बुज
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[19 Oct 2009 14:24 PM]



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