तुम जब भी मेरे पास आये

चिंतन मेरे मन का तुम जब भी मेरे पास आये, प्यार की परिभाषा बदलती रही। जब भी तुमने मुझे छुआ अहसास हमारे हर पल बदलते रहे। तुम्हारी आँखों ने जब भी कुछ कहा सपने मेरी आँखों के बदलते रहे तुम्हारे दिल ने जब भी मुझे पुकारा दिल के जज़बात फ़िर तड़पेंगे लगे रात की खामोशी जब कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[19 Oct 2009 13:07 PM]

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