बनावटी चेहरे
यहां हर कोई बनावटी चेहरे लिए घूम रहा है। सबके चेहरों पर मुखौटे हैं। व्यक्ति बाहर से दिखता है, वैसा अंदर है नहीं। जैसा वह अंदर है, बाहर वैसा दिखना नहीं चाहता। चेहरों की मानो मंडी लगी हुई है। चेहरों के इस बाजार में आदमी खोजना मुश्किल है। आजकल बस आकृतिय...
[पूरी पोस्ट]
श्रीकांत पाराशर
24
1
0
1
9
[19 Oct 2009 07:23 AM]



Shuffle








