मेरी कुछ बातें

अंतर्द्वंद का आइना मैं सोचता हूँ हर दिन कुछ करुँ नया ! सोचते - सोचते कुछ न मिला और वो दिन बीत गया ! मेरा सवेरा होता था कुछ ख़ास लम्हों के साथ ! बीतती थी मेरी रात एक नए सोच के साथ ! दीवार बनकर उदासी मेरे दिल पर ! क्या करुँ , क्या न करुँ बचकर रहता हूँ इससे मैं घबराकर ! म... [पूरी पोस्ट]
writer V. VIVEK
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[19 Oct 2009 07:17 AM]

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