ऊँड़स ली तू ने जब साड़ी में गुच्छी चाभियों वाली

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... उम्र के इस पायदान पर भी अंदर का बचपन किलकारियाँ मार उठता है छोटी-छोटी खुशियों पर भी। छोटी-छोटी खुशियाँ...जैसे कि दीपावली की शाम को एक स्नेहिल नर्स द्वारा चुपके से आकर कैडबरिज का फ्रूट एंड नट वाला बड़ा-सा पैकेट पकड़ा देना। छोटी-छोटी खुशियाँ...जैसे कि एक... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी

बहरे-हज़ज

views
48
upvote
8
downvote
0
rating
8
comments
25
[18 Oct 2009 20:59 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix