शेरोशायरी का मजा ले, न मन करे तो छोड़ दें

खंभा सुबह-सबेरे एक व्यक्ति को अलग-अलग समय इस पंक्ति को दोहराते-तिहराते सुना। कुछेक घंटे बाद अपन ने भी तोता पाठ जारी किया। शाम क्या, रात तक चला। नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती। मगर जब याद आते हैं तो अकसर याद आते हैं।। -हसरत मोहानी कितना अच्छा होता... [पूरी पोस्ट]
writer खंभा
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[18 Oct 2009 16:19 PM]

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