उलझन
आज कल कहीं मन नही लगता , बस यूँ ही घूमता रहता है , यही सोचता रहता है की क्या सपने सच होते हैं , "मेरे सपने " । बचपन में देखे बिना किसी रोक टोक के सपने , वो उड़ने की ख्वाहिश , उछल कर आसमा को चूम लेने की ख्वाहिश , बादलों के बीच घर बनाने की तमन्ना , जब...
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[04 Aug 2009 18:07 PM]



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