'ए' हाथ छुडाने वाले....!

कुनाल (सिफर) आज बस यूँ ही मन किया की मैं भी अपना एक आशियाना बनों .. तो बस इस तरफ चला आया... और देख मेरे खुदा ... अपने आपको मैंने खोदा है तो क्या पाया है... वही जो बस उस वक़्त जेहन मैं आया .. जब साँसों ने चलने से इनकार कर दिया था.. पर न जाने क्यूँ.. तब भी एतबार था... [पूरी पोस्ट]
writer Kunaal
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[14 Oct 2009 08:07 AM]

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