किस्मत जो बदल न पायेंगे...!
तुम हकीकत हो या ख्वाब, .. पर तुम्हे सच मान के जिंदगी जीता हूँ मैं ... की मेरे अरमानों मैं तुम्हारा अक्स है कहीं न कहीं ... जिसे मे देख सकता हूँ... छु सकता हूँ... पर पल भर मे सिमट जाता है वो कहीं... दिल रोज़ जी उठ-ता है और रोज़.........! _--_--_--_--_...
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Kunaal
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[16 Oct 2009 07:07 AM]



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