दिवाली मे घर जला रहें है ...!
अँधेरे को अँधेरा रहने दो... डूबा हुआ सवेरा रहने दो... मुझे आदत है सन्नाटे की ... रिश्तों मे हमेशा घाटे की.. ज़रुरत नहीं मुझे रोशनी की... बस हटा दो कोई लकीरें मेरे माथे की ... चाहे खलाओं मे मेरा बसेरा रहने दो.. जो मेरा है उसे मेरा रहने दो .. डूबा हुआ...
[पूरी पोस्ट]
Kunaal
25
3
0
3
0
[18 Oct 2009 12:04 PM]



Shuffle








